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नवंबर, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मन अनुरागी जोगी तेरा हम-तुम में कैसी ये अनबन

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मन की सूती जिज्ञासा को काँटों पर मत रखना प्रियतम मन अनुरागी जोगी  तेरा हम-तुम में कैसी ये अनबन ********************* कितने  रुच रुच नेह निवाले सोच सोच कर रखतीं हो ! एकाकी होती हो जब तुम याद मेरी कर हंसती हो ! मत रोको अब प्रेम धार को कह दो कब होगा मन संगम मन की सूती जिज्ञासा को                                                          काँटों पर मत रखना प्रियतम..! ************************ पीत-वसन -प्रीत भरा मन पल-पल मुझसे मिलने आना   कोई और निहारे मुझको बिना लपट के वो जल जाना प्रेम पथिक हम दौनों ही हैं  प्रिय तुम ही अब  तोड़ो मन  संयम ! मन की सूती जिज्ञासा को काँटों पर मत रखना प्रियतम..! _______________________________________________ चित्र साभार:स्वप्न मंजूषा शैल व्हावा http://mishraarvind.blogspot.com _______________________________________________

इनको आज सुनना ज़रूरी है...!!

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  कहीं  दूर  जब  दिन  ढल   जाये  आजा  पिया  तोहे  प्यार  दूं    चुनरी संभल  गोरी   और अब सुनिए   सायोनारा  सायोनारा               मेरी पसंद सुनिए तेरे  बिना  ज़िन्दगी  से कोई शिकवा तो नहीं     

प्रेम पत्र के साथ गुज़ारा कब तक करूँ कहो तुम प्रियतम

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प्रथम प्रीत का प्रेमपत्र ही सिहरन धड़कन का कारन अब नयनगंग की  इन  धारों को  लौट के देखा तुमने है कब प्रेम पत्र के साथ गुज़ारा कब तक करूँ कहो तुम प्रियतम **************** हुई हुलासी थी तुम जब तुमने प्रेमपंथ की डोर सम्हाली कैसे लुक-छिप के मिलना है तुमने ही थी राह निकाली जब-तब अंगुली उठी किसी की थी तुमने ही बात सम्हाली ! याद करो झूठी बातों पर हम-तुम बीच हुई थी अनबन...! प्रेम पत्र के साथ गुज़ारा कब तक करूँ कहो तुम प्रियतम *****************************  आज विरह का एकतारा ले स्मृतियों के गलियारों से तुम्हें खोजने निकल पडा हूँ अमराई में कचनारों  में जब तक नहीं मिलोगे प्रियतुम सफ़र रहेगा अंगारों में इस यायावर जीवन कोई तो देगा मन-संयम प्रेम पत्र के साथ गुज़ारा कब तक करूँ कहो तुम प्रियतम

प्यार की ख़ूबसूरत रिवायतों से रूबरू कराते ये गीत

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फिर छिड़ी रात बात फूलों की एक मधुर मदिर तमन्ना ! इश्क का ये रूप देखिये प्यार की ख़ूबसूरत रिवायतों से रूबरू कराते  ये गीत मुझे अपने पहले प्यार की और खीचता उस दौर तक ले गया जब मेरी प्रिया ने देखे थे कुछ सपने और मैं उनको देखते ही गुनगुनाता  था तब प्रिया ने देखे थे सपने और कहा था  करोगे  याद  तो ...हर बात याद आएगी  आज सच हुई तुम्हारी बातें प्रिया . सच तुमको खोने के बात तुम्हारी तलाश में जब रुक जातें हैं   कदम   तुम्हारा कहीं आस पास होने का  एहसास होते ही अपने आप माँगने लगता कुछ सामान  बिन तुम्हारे मुझसे अब ये गीत ... गाया भी नहीं जाता कहाँ हो प्रिया तुम अब भी लौट आओ मेरे उदास  बेबस दिल की    =>तमन्नाओं के मचल जाने के लिए

मेलोडी ऑफ़ लव

                                                                    हिन्दी  फिल्मसंगीत और प्रेम में गहरा अंतर्संबंध माया नगरी के चितेरों ने उन दिनों सदाबहार गीतों से जोड़ लिया था सारे देश को.   सच्चाई  छुप  नहीं  सकती ,ओ  मेरी  शर्मीली ,अजनबी  तुम  जाने  पहचाने ,ये  जो  मोहब्बत  है ,माना  जनाब  ने  पुकारा  नहीं     इन गीतों को सुन कर आपके सारे तनाव दूर हो जाएंगें यकीनन   किशोर  दा की आवाज़ का कोई विकल्प दूसरा .......? आज के दौर में कोई नहीं . उस दौर की इस आवाज़ की कशिश से तो आप परिचित ही है ओह  रे  ताल  मिले  नदी  के  जल  में सुनके तो आप मस्त हो ही जाएंगें . अरे जी लता जी को मैं क्यों भूलूं इस गीत को सुन के उनकी याद में कोरें भीग गईं आप भी सुनिए   आजा  पिया  तोहे  प्यार  दूं  और  हाँ  उनकी याद में जिनके लिए गुनगुनाया करता था मैं ये गीत " कितना  प्यारा  वादा  है  "कभी क्वाबों में सोचता कि  मेरे  सपनों  कि  रानी कब आयेगी  जी हाँ तब जब उनके बिना ज़िंदगी काटनी पडी तो जब भी पहली प्रीत याद आती है यही गाने गुनगुनाने को मन करता है:-" दिल  जो  न  कह  सक

गीत सुनिए जानिये हाले दिल

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 गुलाम  अली साहब  और  जगजीत  सिंह साहब के सुरों में प्रेमगीत आपको इस लिए पसंद है की आपके दिल की ही  बात है. जो सुरों से सजी-धजी  फिर अपने घर यानी आपके दिल में वापस आती है.  आज मेरे दिल ने चाहा और जी भर सुना झूम उठा माशूका के चौदहवीं के सरीखे चाँद से चेहरे को याद कर . किसी ने सही ही कहा है  हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा किन्तु  जुस्तजू  जिसकी  थी उसे न पाकर हमारी क्या दशा  होगी आप क्या जानें . __________________________________________________________ आज महफूज़ भाई का ये   ब्लॉग देखिये ज़रूर बेहद भावनात्मक आलेख है,उधर अपने  भाई संजय तिवारी को एक रहस्यमयी चिट्ठी मिली आप ज़रूर देखिये. रहा सवाल चर्चा की सो वो इर्द गिर्द से शुरू होकर इर्द गिर्द  पे ही ख़त्म होती है.सुकुल जी चाहे जो कहें  इग्नोर शब्द   को जीना भी एक कला है ...   __________________________________________________________  साभार :-यू-ट्यूब,

आज तुमसे न मिल पाना तुम्हारे होने को परिभाषित कर गया

आज तुमसे न मिल पाना तुम्हारे होने को परिभाषित कर गया और तुम भी बेचैन तो होगे ही मुझे मालूम हैं अब-तब किसी न किसी बहाने मुझे याद कर रहे होगे तब मुझे हिचकियाँ नहीं आयी बस निश्चेत सी मेरी देह रोम-रोम बसे तुम्हारे प्यार से सराबोर हो रही थी.......! सच तुम्हारी प्रीत एक दिव्य अनुभूति है... जो कल भी अकूती थी आज भी अकूती है जिस्मानी ज़रूरतों से अछूती है ! प्रियतम यही है सच्चे प्रेम का अनुभव चलो एक बार फिर हम कुछ दूरियां बनाएं प्रेम में सच्चाई की लों  जगाएं ... वही लों दुनिया के सामने ला देगी "हमारी -तुम्हारी -सच्ची-प्रीत कथा   " ___________________________________ जबलपुर ब्रिगेड मुकुल'स ब्लॉग, इश्क-प्रीत-लव मिसफिट बावरे-फकीरा ___________________________________

बस यही है प्रेम तपस्या तापसी

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तुम जो परिधि लांघना चाह के रुक जाती हो       अन बोले सवालों के  जवाबों की प्रतीक्षिता सी       तुम्हारा  मन जब तब रोकता मुझसे इन्हीं अनकहे सवालों       के ज़वाब के लिए      तुम बहाने से बात करतीं     स्वपन-प्रिया आओ एक सच से मिला दूं तुमको     वो नरमदा है न     उसके दो किनारे से हम तुम कभी न मिल सकेंगें    बस यही है प्रेम तपस्या तापसी   इस प्रेम को देह न जोड़ सकूंगा...   कोई नाम देकर तुमसे रिश्ता न जोड़ सकूंगा   इस बेनामी रिश्ते के सहारे चलो एक बार फिर से अदेह सवालों को जप्त करें हम तुम !

तनेज़ा जी क्या करूं इस नोटिस का ?

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देखिये  यहां  भाई राजीव जी की घर तोडू कारगुजारी की वज़ह से मेरी दाल पतली है .दो दिन से भूखा प्यासा  पत्नीव्रता (अवसर न मिलने की वज़ह से )  पुरुष दर दर की ठोकर खा रहा हूं. घटना देर रात 09/11 /09  नौ   बजके 9 मिनिट 9 सेकंड की है. देर रात सरकारी काम काज से फारिग होता मेरा शरीर घर में घुसा ही था कि आदतन मैंने मेल चैक की गरज से नेट ऑन किया और एकाध ब्लाग देखने की गरज से सबसे पहले वादे के मुताबिक राजीव जी के ब्लॉग पे पहुंच गया. अपना फोटो देख के दिल में क्विंटलों लड्डू फूटने लगे.  बस फिर क्या था कि हमारी पीछे खड़ी एक अदद सतफेरी- बीवी श्रीमती  बिल्लोरे ने हमारी ख़बर लेनी शुरू कर दी . बोलीं:-"ये कल मुहीं कौन है.....?" ख़ूबसूरत हसीन तारिका  का अपमान मुझे खला सो यकबयक मुंह से निकल पडा-"कलमुहीं...? अरे देखिये कितनी ख़ूबसूरत है ! आपसे..भी.....  !"                                                                बस फिर क्या था हमारी श्रीमती जी ने हमारी वो गत बनाई कि हम लुटे पिटे जमानत जब्त कराए नेता से इधर उधर डोल रहे हैं.आपके सामने भाई राजीव तनेजा जी की वज़ह से हमको  जो दर्द

आज इस गीत से काम चलेगा.?

सन्मुख प्रतिबंधों के कब तलक झुकूं कहो

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  एक गीत प्रीत का गुन गुना रहा है मन ****************************************** थी  चपल हुई सरल , प्रेम राग है यही नयनों ने कह डाली बातें सब अनकही नेह का निवाला लिए दौड़ती फिरूं मैं क्यों पीहर के संयम को आजमा रहा है मन ! ****************************************** भोर की प्रतीक्षिता,कब तलक रुकूं कहो सन्मुख प्रतिबंधों के कब तलक झुकूं कहो बंधन-प्रतिबंधन सब मुझ पे ही लागू क्यों मुक्त कण्ठ गाने दो जो गुनगुना रहा है मन ****************************************** मैं बैठीं हूं कब से प्रीत के निवाले ले मन में लेके उलझन, हिवडे में छाले ले मादक है प्रीत नींद क्योंकर मन जाग उठे मत जगाओ सोने दो कसमसा रहा है मन ****************************************** छवि :वेब दुनिया से साभार