बस इसी आभासी दुनिया में उसका भी ठिकाना है :सुनीता शर्मा


वो हवा के झोंके सा आया .
मेरे तनहा जीवन में .
एक आस सजाने लगी .
मैं वीरान उपवन में ..
कब वो जीवन का .
एक हिस्सा बन गया .
रोज याद करूँ .
यादगार किस्सा बन गया .
न देखा उसे .
न जाना है ..
बस इसी आभासी दुनिया में
उसका भी ठिकाना है .
रोज शाम परिंदे की तरह ,
हम फेसबुक की डाल पर मिलते हैं .
करते हैं , एक दूजे से गिले शिकवे ..
फिर भी मिलने को तरसते हैं .
आज जुकर बर्ग की मेहरबानी .
की शब्दों का आकर मिला .
तनहा जिन्दगी में .
दोस्तों का संसार मिला .
इस अंतरजाल की ,
नवमी वर्षगाँठ में ..
हर दोस्त को दिल से दुआ है .
आभासी कहते हैं इसे जरुर .
पर इसने सत्य को जिया 

टिप्पणियाँ

  1. waah .............facebook ki nawmi warshganth me dost ka ye tohfa hmen pasand aaya ...shukriya girish ji

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  2. बहुत गहन भाव और प्रेम की तलाश को संजोये एक सुंदर सी कविता..

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  3. बहुत खूब भाव पूर्ण प्रस्तुति

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    एक शाम तो उधार दो

    मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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