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किसे इंतज़ार होगा चांद का जब तुम

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       छवि : डॉक्टर जूलियन मेगन, डेट्रोइट,                   मिशिगन, यू एस ए                 💐💐💐💐💐💐 किसे इंतज़ार होगा चांद का जब तुम सामने हो अँजोरी बिखेरतीं...  मुस्कुरातीं एक आध्यात्मिक  ऊर्जा की फुहारें  ओस की बूंदों जैसी भिगो जातीं हैं..मन को..! आओ एक बार कि अद्वैत में खो जाएं..! चेतना की मदालस  अँजोरी से धनाढ्य हुई  इस मुखरित निशा के अछोर शामियाने में आओ मिलें और कि एक हो जाएं..!

दीपावली और रंगोली ...!

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हां !! मुझे याद हैं वो दिन जब  तुम अंगूठे और तर्जनी के बी़च रवीली रंगोली कस के उठातीं थीं फ़िर रवा-रवा रेखाओं के लिए  बिंदु - बिंदु मिलाती  आंगन सजाती !! तब मैं भी एक "पहुना-दीप" तुम्हारे आंगन में रखने के बहाने आता था .. याद है न तुमको  फ़िर अचकचाकर तुम पूछती-"हो गई पूजा !" और मैं कह देता नहीं-"करने आया हूं  दीप-शिखा की अर्चना.." अधरों पर उतर आती थी मदालस मुस्कान ताज़ा हो जातीं हैं वो यादें अब  जब जब  रंगोलियां आंगन सजातीं हैं

कौन होगा अब निराला..?

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*कौन होगा अब निराला* 💐💐💐💐 सभी अपने खंड में हैं ! और कुछ पाखंड में हैं !! सभी की अपनी है मदिरा सभी का अपना है प्याला ! कौन होगा अब निराला ? एक अक्खड़ सादगी थे । विषमता के पारखी थे ।। निगलते तो निगल लो - कष्ट का सूखा निवाला ।। कौन होगा अब निराला ? वो गुलाबी झड़प उनकी याद है न तड़प उनकी ? शब्द के हथियार लेकर  मोरचा कैसे सम्हाला !! कौन होगा अब निराला ? शारदा से मांगना वर  शब्द उनके सभी के स्वर कदाचित मिले तो बताना - वृक्ष निराला , छायावाला !! *गिरीश बिल्लोरे मुकुल*

प्रीत का सागर हॄदय में लेकर तुम्हारी प्रतीक्षा में

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मैं प्रीत का सागर हॄदय में  लेकर तुम्हारी प्रतीक्षा में   तुम उधर लहरों के संग  जूझते होंगे यकीनन ।। मैं हिय के ज्वार से बेचैन हूँ ।। विश्वास है तुम ने  लहरों को नियंत्रित कर लिया है भयावह लहरों  को पतवार से मेरे मन में उभरते प्रेम जैसा अपने वश में कर लिया है ।। मेरे मन की लहरों के  इस ज्वार का मैं क्या करूँ ? आओ प्रियतम  अभिसार के बिन  बांध का धीरज न टूटे । याद आते हैं मिलन  पल प्रियसंग जो थे अनूठे ।। फोटो : मुकुल यादव