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"पूनम पाण्डे" सुर्खियां में क्यों..?, जबकि ज़रूरत है "अरुणिमा-सिन्हा" पर चर्चा

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                  " पूनम पाण्डे " का सच जो भी हो सुर्खियां क्यों दी जा रही हैं उसे जबकि ज़रूरत है " अरुणिमा " पर चर्चा कर उसके प्रति संवेदित रहने की. ये तो सही है कि  न तो मैने न ही किसी ने संस्कृति बचाओ अभियान का ठेका लिया है हमें क्या ? हमारी एक अलग धारा है, चिंतन की किंतु ऐसी खबरें समाज की नई पौध की गिरावट की जो सूचना दे रही है उस पर सोचना उसे रोकना ज़रूरी है.   सद्य प्रकाशित एक गैर ज़रूरी समाचार की   कुछ लाईने देखिये  " कानूनी विशेषज्ञों की राय में मॉडल पूनम पांडेय का भारतीय क्रिकेट टीम के वर्ल्डकप जीतने पर निर्वस्त्र होकर जश्न मनाने के लिए बीसीसीआई से अनुमति मांगना लोगों को गुमराह करने से अधिक कुछ नहीं। सार्वजनिक स्थल पर कपड़े उतारकर जश्न मनाना अश्लीलता की श्रेणी में आता है जो अपराध है और बीसीसीआई या अन्य व्यक्ति को अपराध के लिए अनुमति देने की इजाजत नहीं है। वर्ल्डकप फाइनल से पहले पूनम ने कहा था कि वह टीम इंडिया की जीत पर कपड़े उतारकर जश्न मनाएंगी और वह अब भी इस बयान पर बरकरार हैं। यह मॉडल साथ ही कह रही है कि वह ऐसा करने के लिए बीसीसीआई से अनुमति का इंतज

सजना है मुझे

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इस गीत में कामिनी की कामना का अंदाज़ अब ये देखिये नये जमाने की सजावट