गुलाब दिवस पर : प्रिय तुम गुलाब हो








मौन फ़िर भी पूर्णत: व्यक्त
मदालस गंध से संपृक्त....!!
तुम्हैं पाकर अक्सर मन कहता है
तुम पूजा के योग्य हो..!!
और फ़िर लगाता हूं
पूजा के लिये जुगत
ताम्र-पात्र में गंगा सा पावन जल
चंदन अक्षत रोली गंध-सुगंध
सच ये सब तुम्हारे ही तो मीत हैं..
तुम आराधना के सहभागी
तुम  पावन  और  अनुरागी
लोग कहतें हैं तुम "शबाब" हो
मेरे लिये तुम पूजा की थाल का गुलाब हो ..!!

टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति………गुलाब दिवस की शुभकामनायें।

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  2. मौन फ़िर भी पूर्णत: व्यक्त

    बेहतरीन शाब्दिक चयन....सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

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  4. तुम आराधना की सहभागी
    तुम पावन और अनुरागी
    लोग कहतें हैं तुम "शबाब" हो
    मेरे लिये
    गुलाब हो ..!!

    अद्भुत अभिव्यक्ति......

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  5. वाह लाजवाब प्रस्तुति मुकुल जी ...
    गुलाब का शबाब भी तो काँटों से निखरा रहता है ...

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