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दिसंबर, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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इस तस्वीर की नायिका की मनोदशा उजागर करती कविता का इन्तज़ार रहेगा अन्तिम तिथि : २५/१२/२०१० शाम ५ बजे तक

इश्क में बेक़रारी

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एक छोटी सी प्रेम कहानी

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आज़ सौं वी पोस्ट निहायत आज़ के दौर के प्रेम संबंधों को उजागर करने की कहानी है आप इस ग़लत फ़हमी में न रहें कि कोई छोटी सी सच्ची सी प्रेम कहानी परोस रहा हूं चालीस साल का वह पैंतीस साल की उससे कनाट प्लेस में मिलते हैं वह उतरता है  एक बड़ी सी मंहंगी कार में इसके पास भी कार तो है महंगी भी पर वैसी नहीं उस जैसी तो बिलकुल नहीं   जिससे  वह उतारा. दौनों का आकर्षक व्यक्तित्व . रेंष्ट्रा में दौनों को कुछ खाने की तलब . दिल्लिया रेस्टारेंट दोपहर को हरे भरे से से लगते डी यू के छात्र अपनी गर्ल फ़ैंड्स को लेकर आए थे कब्जाए थे टेबुल मज़बूरी में इनको भी टेबुल शेयर करनी पड़ी. आर्डर एक सा दिया बस वही ब्रेड हल्का बटर काफ़ी,पैंतीस साल की उसने बात शुरु की :”गाड़ी तो गज़ब है..? चालीस साल का वह :- जी शुक्रिया  पैंतीस साल की  :-क्या करतें हैं आप..? चालीस साल का वह :- "  .... " का कारोबार है ! आप  पैंतीस साल की  :-"हाउस वाइफ़ हूं ! "चालीस साल का वह :-  "सिंगल ? पैंतीस साल की  :-यही मान लीजिये ! चालीस साल का वह :-  मान लीजिये ? पैंतीस साल की  :- जी वे फ़ारेन टूर पर रहतें हैं ज़्यादातर चालीस साल का वह :

आभास ने कहा था दिया मिर्ज़ा को "I love you"

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Abhaas - Tum Mere Ho - SVOI -                                   "खदानों के पत्थर जो अनुमानतें हैं मेरे घर की बुनियांदें वो जानते हैं "        इज़हारे इश्क का हौसला हा ! हा !! हा !!! आभास ने किया था 17 की उमर में  :- इज़हार-ए-इश्क़  सच सत्रह का था तब इधर हम तो इज़हारे तमन्ना नहीं कर सके थे 25 के हुए तब तक, शादी  के बाद ही कह पाते थे हमारे दौर के लोग :-"I love you" और वह भी कभी एकांत में अकेले में.  कहते भी खैर छोड़िये उस दौर की रूमानियत को  जो दौर है उसी के सात कदम ताल कीजिये. पर इश्क के सही मायने बच्चों को अब बता देना ज़रूरी है अब जब कि आज का दौर तो साड़े आठ बरस में की उम्र पर्याप्त हो गई  "I love you"  पूरा दिन में से जितना भी समय मिले बच्चों के साथ गुज़ारने के लिये थोड़ा वक़्त न मिले सम्भव नहीं... वरना फ़िर न कहिये  जी बिलकुल न  कहियेगा तौबा-तौबा आज़ के दौर के इज़हारे- इश्क़ -ने तो  उम्र,तहजीब,तमीज़ की सारी हदैं पार कर दीं.

इस प्यार को क्या कहेंगे आप ?

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सनी पवार आरती आरती मकवान की मां आरती दुर्घटना के पूर्व आई बी एन खबर पर 23 सनी पवार  का  ढेड़ साल से कोमा में पड़ी अपनी प्रेमिका आरती मकवान  को आज़ भी उतना ही प्रेम करता है जितना उसके कोमा में जाने से पहले आश्चर्य होगा आज के दौर में ये सब कैसे सम्भव हुआ अनिता धुक्कर  की रिपोर्ट जिसे  देख कर आंखें नम जाएंगी आपकी.आरती एक एक्सीडेंट में गम्भीर रूप से घायल होने के कारण कोमा में है . सनी पवार ने तय किया  है कि -वो ता उम्र आरती को सम्हालेगा उसकी  सेवा करेगा  और प्यार देगा. इस अनूठे प्यार की फ़ुटेज आपको फ़ेसबुक पर यहां मिलेंगी सैल्यूट सनी पवार को जो दीवारों पर उत्साह की कविताएं स्लोगन्स लिखता है जिन दीवारों को देखती है आरती ही आंखें..24सौं घंटे 7तौं.दिन बस सेवा उस प्रेमिका की जिसकी ज़िंदगी एक स्थिर स्तब्ध और नि:शब्द है.... वाह इस प्यार को क्या नाम देंगे आप  सनी पवार तुमको सलाम !!

आभासी प्रियतमा

तुम्हारी प्यार भरी भोली भाली बातें सुन बन जातीं हैं रातें लम्बी रातें तुम कौन हो क्यों हो उस आभासी दुनिया के उस पार से जहां एक तिनके की आड़ लेकर देख रहीं हो कनखियों से   सच तुम जो भी हो आभासी नही   प्रेम की मूर्ति   हां वही जो कलाकार गढ़तें है वही जो गीतकार रचते हैं फ़िर भी खुद से पूछता हूं कल पूछूंगा उनसे तुम कौन हो