पोस्ट

अप्रैल, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज़ सुनिये ये गीत

जोगी जबसे आया तू आया मेरे द्वारे  ओ रे मांझी मोरा गोरा अंग

पाबला जी पगडी में क्या है सुनिये शरद कोकास से

 छत्तीसगढ में भी है पारा 45 डिग्रि है .  तपन से भरे दिन कैसे गुज़र रहे हैं वहां सुनिये शरद जी की ज़ुबानी उनने जैसी बात हुई हू ब हू पेश है

आवाज़ पे सुनिये एक गीत जो यादों को सहला गया

साथियो हिंद-युग्म के महत्वपूर्ण पन्ने आवाज़ पे एक गीत जो मेरी पसंद है यहां सुनिये ,

राज कपूर की फ़िल्मों के गीत

इमेज

मेरा पसंदीदा गीत आप भी सुनिये

स्निग्धा तु मेरी सासों में घोल रहीं थी अमिय

                  स्निग्धा तु मेरी सासों में घोल रहीं थी अमिय तब से अब तक सिर्फ़ मैं सीख पाया हूं प्यार की बातैं ओ चिर छाया तुम्हारा आभास लेकर ज़िंदा हूं वरना कब का धुएं के गुबार के साथ जो चिता पर उभरती लौ से भागती नज़र आती हैं अनज़ान दिशा में गुम हो जाता लोग तब मेरी पराजित देह पर शोक     मनाते बैराग भोगते वहां कुछ पल का किंतु ज़िंदा हूं तुम्हारे अमिय की ताकत बाकी है मुझमें तुम से सच आज़ भी उतना ही प्यार है............ ओ मां.......तुम फ़िर उस जनम में होना मेरी मां सच अबके जनम में तुमको तनिक भी कष्ट न दूंगा मां .......मुझे तुम्हारे निर्दोष प्रेम की कसम

सानिया कहा था न कल्लू पहलवान हुंकार भरेंगें

इमेज
ये रिंग है कल्लू भाई                                                            ++++++++++++++++++++++++++++++++++++++                                                                           लो भाई सानिया मिर्ज़ा को और उनके परिवार भोपाल की एक समाजी संस्था  ने कौम  से बाहर का रास्ता  दिखा दिया है. ?ये खबर सानिया मिर्ज़ा दूल्हे मियां सोएब मलिक और सानिया के अम्मी अब्बू की सेहत पर कितना असर डालती है  कोई नहीं जानता लेकिन संस्था  के अध्य्क्ष कल्लू पहलवान ज़रूर प्रदेश भर में छाये रहे दिन भर .  मियां कल्लू पहलवान कुछ भी कल्लो बो तो ले गिया भिया पैले से इतिल्ला कर देते शोयेब और  सानिया को तो शायद वो आपकी पेल्वानी {”पहलवानी”} का मान रख लेते अब क्या ..? जाओ रमजानी के टपरे से ज़र्दे वाला पान लियाओ और चबाओ भाई मियां ...!                            आज़ अखबार में नाम छपा है शायद मुफ़्त में इज़्ज़त सहित रमज़ानी गिलौरी पेश करे ... +++++++++++++++++++++++++++++++++++++  

महफ़ूज़ अली की कविता वाली ती शर्ट पहनेंगे अमेरिकन

इमेज
उस व्यक्तित्व को कौन पसंद न करेगा जिसका घर गोरखप्रुर / लखनउ /जबलपुर में कहां है कोई नहीं समझ पाया यानि सबके अपने प्यारे महफ़ूज़ मियां जितने  गोरखप्रुरके हैं उससे ज़्यादा  लखनउ  और जबलपुर के हो गये.....! _______________________________________ ”विशेष अनुरोध ” मित्रो, सादर अभिवादन, जैसा कि आप को ज्ञात होगा विगत कई दिनों से ब्लॉग जगत को स्वयं महफूज़ अली ने तथा अन्य लोगों ने अवगत करा ही दिया था कि उनकी एक कविता ''फायर,इस स्टील अलाइव'' को नेन्सी डिकलमान ने टी-शर्ट पर मुद्रित करा कर उनके पास भेजा है. इसके प्रमाण उनके द्वारा मुझे उपलब्ध भी कराये जिसे मैने यहां मेलोडी ओफ़ लाइफ़ पर  इस गरज़ से दर्ज़ कर दिये थे ताकि किसी भी प्रकार का संदेह न हो जैसा कि कुछ लोगों ने व्यक्त किया है ! मित्रो जो भी तथ्य है उनसे हुई चर्चा के अनुरूप पोस्ट पर हैं . इस पर बेनामी टिप्पणी कर्ताओं क्रमश: ब्लाग समाचार , मीनिका ,तथा स्वयं श्री अरविंद मिश्रा जी नें व्यक्तिगत खुन्नस निकाली जो उनके और महफ़ूज़ के बीच सम्भावित है  , अस्तु मिश्र जी को एक मेल के ज़रिये मैने अपनी बात कह दी है . महफ़ूज़ के बारे में उनक

सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है संजय पर बात करना

इमेज
संजय एक विजेता खिलाडी  किंतु हताश है संजय या इन जैसे अभावों में जूझते खिलाडियों पर इस वक्त चर्चा  होनी ज़रूरी है  सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है सानिया मिर्ज़ा की शादी शोएब के साथ आयशा के सम्बन्ध में पल छिन की खबर देते मीडिया के  लिये यह खबर कितनी ज़रूरी लगती है य देखना है अब                                                                                                             " नियमों की भेंट न चढ जाये यह खेल प्रतिभा : जबलपुर नगर का युवा पावर लिफ़्टिंग खिलाडी संजय बिल्लोरे  का चयन मंगोलिया की राजधानी उलानबटर में दिनांक ०१ मई से ५ मई तक आयोजित एशियन पावर लिफ़्टिंग चैम्पियन शिप २०१० हेतु इंडियन-पावर-लिफ़्टिंग फ़ेडरेशन व्दारा किया गया  है. किंतु इस   खेल के  नान औलौंपिक श्रेणी का होने के कारण न तो राज्य सरकार से और न ही भारत सरकार से   खिलाडी को कोई मदद शासकीय तौर पर मिलना कठिन हो गया है. एक मध्यम वर्गीय युवा खेल-प्रतिभा को  मंगोलिया तक की  यात्रा के साधन जुटाने में जो ज़द्दो-ज़हद करनी पड रही आत्म विश्वास से भरे इस युवक को पूरा भरोसा है अपने बेहतर प्रदर्शन के लिये: संजय का कह

गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?

इमेज
अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहो गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ? मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँ तुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !! मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब में देह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब में नारी  बस देह..? नहीं प्रचंड अग्निपुंज भी मान जो उसे  मिले हैं शीत-कुञ्ज भी ! चीर हरण मत करो मत हरो मान मीत भूलो मत कुरुक्षेत्र युद्ध एक प्रमाण मीत ! जननी हैं ,भगनी है, रमणी हैं नारियां - सुन्दर प्रकृति की सरजनी हैं नारियां  हैं शीतल मंद पवन,लावा  ये ही तो हैं धूप से बचाए जो वो  छावा यही तो हैं !