प्रीत गीत की वेला में


प्रेम की मदिर स्मृतियों मे तुम्हारी सुमधुर
आवाज़ में  गीत प्रेम  गीत
बार बार याद आ रहा है
और याद आ रही हो तुम इस वेला


सच प्यार के वे पल जो मैं जीता हूं
शायद ही किसी को नसीब हुए हों..!!
सच है न.. पोर-पोर प्यार भीगा मैं
अनाभिव्यक्त मदालस प्रीत की गंध
अब तक दिलो-दिमाग़ से ज़ुदा न कर पाया
सच ........ तुम कहां हो
मैं अकेला कहां आ गया
बस तन्हाई से अक्सर ये बातें करता हूं


टिप्पणियाँ

  1. ....सुन्दर प्रस्तुति....भाईदूज की शुभकामनाएं...गिरीश जी

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  2. बहुत ही सुन्दर अंदाज और अल्फाज!
    शुभकामनायें!

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