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मेरा अनाभिव्यक्त प्रेम और तुम

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       33 साल पहले निक्की से प्रेम की अभिव्यक्ति ना कर पाया सुयश अपने आप में अपराध बोध लेकर जी रहा था। ऐसा नहीं कि सुयश ने कोशिश नहीं की घर तक भी गया। परंतु दरवाजा खटखटाया बिना लौटना ही उचित समझा। सोचता रहा कि जॉब लग जाए फिर बात करूंगा ! और फिर दूसरा मसला यह भी था कि पता नहीं निक्की मुझे स्वीकार की कि नहीं। स्वीकारती ना स्वीकारती यह प्रमुख समस्या नहीं समस्या थी पता नहीं जॉब कब तक लगेगी अगर जॉब ना लगी तो। मध्यवर्ग के परिवारों में प्रेम कुछ यूं ही आकार लेता है और फिर किसी ना किसी कारण से प्रेमी अचानक ऐसे पथ पर खो जाता है जहां से प्रेम पथ पर वापस लौटना नामुमकिन होता है। फिर एक दिन अप्वाइंटमेंट लेटर मिलने पर सुयश इस बात को लेकर खुश था कि आज मैं अपने प्रेम की अभिव्यक्ति अवश्य कर दूंगा। इससे पहले कि वह अपनी बात रखता पता चला  निक्की की शादी होने वाली है। नियति के निर्णय के सामने सुयश ने घुटने टेक दिए। एक जबरदस्त अपराध बोध और हताशा लेकर सुयश जीवन से लगभग असंतुष्ट हो गया था। अपने आप को अपना ही अपराधी समझने वाला सुयश समझ चुका था कि अब जब वह अपने प्रेम को व्यक्त नहीं कर सका तो वह इस क