रविवार, 23 जून 2019

वस्ल के चर्चे गली गली...!


 *हिज़्र का कोई जिक्र नहीं*

वस्ल के चर्चे गली गली
हिज़्र का कोई ज़िक्र नहीं ।
इस बस्ती की फितरत है ग़ज़ब
मेरी तो किसी को फ़िक्र नहीं ।।

कोई ख्वाब नूरानी आएगा
ग़र तुम न हुए वो ख्वाब ही क्या ?
ये किस्से कैसे किस्से हैं
जिसमें रहबर का ज़िक्र नहीं ।।

तुम सबसे सुंदर सबसे हंसी
हूरों से क्या लेनादेना ।
दिल मेरा ज़न्नत से कमतर क्या
ज़न्नत की मुझे कोई फ़िक्र नहीं ।।

सब पूछा किये हम से अक्सर-
अहवाल तुम्हारा नुक्कड़ पे ।
क्या बात हुई मुकुल बोलो -
क्यों आप लगाते इत्र नहीं ।।
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*वस्ल-मिलन, हिज़्र-वियोग*
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*गिरीश बिल्लोरे मुकुल*

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