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वस्ल के चर्चे गली गली...!

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  *हिज़्र का कोई जिक्र नहीं* वस्ल के चर्चे गली गली हिज़्र का कोई ज़िक्र नहीं । इस बस्ती की फितरत है ग़ज़ब मेरी तो किसी को फ़िक्र नहीं ।। कोई ख्वाब नूरानी आएगा ग़र तुम न हुए वो ख्वाब ही क्या ? ये किस्से कैसे किस्से हैं जिसमें रहबर का ज़िक्र नहीं ।। तुम सबसे सुंदर सबसे हंसी हूरों से क्या लेनादेना । दिल मेरा ज़न्नत से कमतर क्या ज़न्नत की मुझे कोई फ़िक्र नहीं ।। सब पूछा किये हम से अक्सर- अहवाल तुम्हारा नुक्कड़ पे । क्या बात हुई मुकुल बोलो - क्यों आप लगाते इत्र नहीं ।। 💐💐💐💐💐💐💐 *वस्ल-मिलन, हिज़्र-वियोग* ****************** *गिरीश बिल्लोरे मुकुल*