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रंग इश्क का वा भई वा !

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गीत : रंग इश्क का वा भई वा ! मौज इश्क की वा भई वा रंग इश्क का वा भई वा ! ज़हर का प्याला पी गई मीरा परबत को दशरथ ने    चीरा असर इश्क का वा भई वा ... !!  *************** सांप को रस्सी बनाके के इक ने कर दी महाकाव्य की रचना मूरख ने भी ग्रंथ दे दिए – साथी बोलो यही था सच न ! असर इश्क का वा भई वा ... !! मौज इश्क की वा भई वा रंग इश्क का वा भई वा !  *************** इश्क देख खुसरो का नाचूं सूरा के नयनों से बांचूं – बुल्ले शा सा बेसुध होके रोज़ नए काफिया राचूं !! असर इश्क का वा भई वा ... !! मौज इश्क की वा भई वा रंग इश्क का वा भई वा !  *************** इश्क उमर-खैयाम निराला इश्क मुझे है मीरा वाला .. साजन का पथ मैं जानूं हूँ जिसपे खुद मैं जाने वाला ! राह इश्क की वा भई वा !! मौज इश्क की वा भई वा रंग इश्क का वा भई वा !  ***************