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जो भी हो तुम इक मदालस प्रीत की अंजोरी हो

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प्रीत डूबे चितवनों में क्या लिखा है जानती हो आईना भी मुग्ध तुम पर क्या आईने पहचानती हो ? जो भी हो तुम इक मदालस प्रीत की अंजोरी हो अपने अनुपम रूप की तासीर क्या है जानती हो ..!! मत समझना आईना तुम देखती हो       आईना खुद तुम पे आशिक हो गया है आईने चुपचाप है और मौन भी है रूप के सागर में तुम्हारे खो गया है             तुम छवि मैं आईना हूं.. मानती हो...!! अबोली तुम कह रही क्या … जानता हूं ..! तुम्हारी हर अदा को पहचानता हूं..!! प्रीत पथ पे कब चला अनभिग्य हूं... पस तुम्हारे पथ को ही पहचानता हूं..!!          ओ, सुनयना.. सच बताना क्या मुझे पहचानती हो !!

वेब दुनिया पर भी चर्चा हुई थी इस ब्लाग की

वेबदुनियां पर रवींद्र व्यास का आलेख  इश्क, प्रीत, लव। यह एक ब्लॉग का नाम है। कहने की जरूरत नहीं कि इस ब्लॉग की साज-सज्जा से लेकर पोस्टें और फोटो इन्हीं भावों के ईर्दगिर्द हैं। यहाँ इश्क, प्रीत, लव की बातें हैं लेकिन इसकी खूबी यह है कि यहाँ किसी भी तरह की दार्शनिकता से परहेज किया गया है और इश्क के भावों को, उसकी आत्मा को और उसकी महक को बहुत सादगी के साथ पेश किया गया है। और तो और यहाँ कविताएँ हैं, गीत हैं और फिल्मों की नायिकाओं के सुंदर फोटो भी हैं। इसके ब्लॉगर हैं गिरीश बिल्लोरे मुकुल। इस ब्लॉग को देखकर ही लगता है कि वे इश्क और प्रीत को लेकर बहुत सारी, अलग अलग रूप और रंगों की भावनाओं को यहाँ अलग अलग ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। कभी किसी तस्वीर के बहाने, कभी किसी गीत के बहाने और कभी किसी कविता के बहाने। और कभी कभी कोई कहानी गढ़कर भी।....   ( अधिक पढ़ने के लिये वेबदुनिया http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0910/02/1091002014_1.htm)