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जैसे सावन सूर को, ऊसर न दिख पाए ...!!

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प्रिय छब ऐसी मोहिनी, लख कछु भी न  भाए- अंखियन से वो सब कहा, ओंठ जो कह न पाए                      ********** गहरे  सागर  से  नयन , मन  भी  गोताखोर-   छवि जो नित न लख सकूं, मनमोर मचाए शोर                        ********** प्रियपथ की अनुगामिनी, अनदेखे अकुलाय जैसे सावन सूर को, ऊसर न दिख पाए ...!!                      ***********

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष : आपका भविष्य फल

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष : 23 फरवरी की ग्रहस्थिति महत्‍वपूर्ण है .. पढिए किन लग्‍नवालों के लिए किन मामलों में ..... लग्‍न राशिफल   गत्यात्मक ज्योतिष वेत्ता श्रीमती संगीता पुरी जी के ज़रिए जाने आप अपना भविष्य

अल्ल सुबह ये क्या होता है

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तुम अदेह का सदेह एहसास हो । जो व्योम के पार ले जाना चाहता है मुझे !! प्रेम में मैंने तुमको तुमने मुझे स्वीकारा है लौहित अधरों से छलकती कंपकपी जाने कब मदालस कर देती है और पहुँच जाते हैं हम व्योम के पार जहां से कोई सूरज ऊग रहा होता है तब तुम सिलवटें सुधारने के करने लगती हो प्रयास !! फिर हौले से एक दीप्त चेहरा लिए ताम्रपात्र में तुलसी पूजन के साधन लिए गुज़रती हो मुझ जैसे आलसी के क़रीब से बाद वही गंध जो निशीथ की किरणों संग मदालस बना देती हो और तुम्हें मदालसा !! अल्ल सुबह ये क्या होता है तुमको एक वीतारागिनी सी गंभीर हो जाती हो ।