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तेरा नाम मुझसे यूं जुड़ा, जैसे मिलता कोई खिताब है....!

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छवि : सोनाक्षी सिन्हा / साभार :  http://www.legendnews.in मैं जो इश्क़ वाली निगाह हूं तू जो हुस्न वाली कि़ताब है जिसे हर निगाह न सह सकी  तू वो आफ़ताबी शबाब है..! मुझे ग़ौर से जो निहार ले , मेरा सारा जिस्म संवार दे - न तो धूल आंखों में रहे , मेरे दिल की गर्दें उतार दे ...!! मेरे प्यार पे  तू यक़ीन कर- हटा ये पर्दे हिज़ाब के !!                                        तू तो आफ़ताबी शबाब है..!   मेरा इश्क़ बुल्ले शा का ,  तेरा  हुस्न  रब दी राह का यूं मुझे न तड़पा मेरी जां , आ बोल मेरा गुनाह क्या ? मेरे इश्क़ का मतलब समझ , नहीं  हर्फ़ ये  हैं कि़ताब के !!                                       तू तो आफ़ताबी शबाब है..! मेरी हर गज़ल तेरी गज़ल, हर गीत में तेरा राज़ है हों ज़ख्म मेरे हरे कभी, तेरी यादें उसका इलाज़ है ,  तेरा नाम हासिल यूं मुझे , जैसे मिलता कोई खिताब है....!                                       तू तो आफ़ताबी शबाब है..!

गिरीश बिल्लोरे की प्रस्तुति.... Dailymotion पर

Girish GIRISH BILLORE MUKUL's videos on Dailymotion

ओ मेरी मुकम्मल नज़्म मैं हर रात खुद से निकलता हूं

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साभार :-तात्पर्य ब्लाग अपने टूटे हुए सपनो की चादर ओढी कलम की कन्दील अपने साथ लिए रात-बे-रात निकलता हूँ.... यूँ ही सूनी सड़कों पर ..!! सोचते होगे न ? किसकी तलाश है मुझको... मेरे मेहबूब वो तेरे सिवा कोई नहीं और नहीं... ओ मेरी मुकम्मल नज़्म मैं हर रात खुद से निकलता हूं जिसकी तलाश में वो तुम ही हो ओ मेरी मुकम्मल नज़्म तुम कब मिलोगी रोशनाई की रोशनी में इल्म का खुशबूदार गुलाब लिये जाने कब से तलाश में हूं... जो भी मिलता है उन सबसे पूछता हूं तुम कहां हो किसी ने कहा- तुम यहां हो ! किसी ने कहा था- न, तुम वहां हो  !! तुम जो मुकम्मल हो मुझे मालूम है सड़क पर न मिलोगी मिलोगी मुझे व्योम के उस पार जहां .... अंतहीन उजास है.. सच मेरे लिये वो जगह खास है मुझे तुम तक पहुंचने के पथ की तलाश है... !!