पोस्ट

मई, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कस्तूरी : इंदुपुरी गोस्वामी

इमेज
मेरी इंदुताई  अदभुत कहानी है कस्तूरी इंदुताई के भावुक मानस से हम तक आई कहानी बहुत कुछ कहने सोचने पर मज़बूर करती है.. मंतो की कहानियों को पढ़ने के बाद ऐसा ही विचार मग्न हो जाता हूं.. ताई से बिना अनुमति लिये ब्लाग पर छाप रहा हूं.. ताई के ब्लाग " उद्धव जी " पर अवश्य पहुंचिये बड़ा भाव प्रणव ब्लाग है.. मेरी ताई भी तो ऐसी ही भावुक है.. जिनको रूबरू कभी नही देखा मैने..                                                                         याद नहीं कितनी पुरानी बात होगी, शायद पन्द्रह बीस साल हो गए होंगे उस घटना को ...... आज भी ज्यों की त्यों  दिमाग में छाई हुई है,रह रह कर जैसे एक दस्तक देने चली आती है ,  'मैं हूँ तुम्हारे आस पास ही  ' कह जाती है. एक बर्तन वाले की शॉप के बाहर खडी थी मैं,शायद कुछ खरीद कर निकली थी . तभी एक हाथ ने  मेरे काँधे को छुआ -'इंदु ' कोई कान के एकदम पास फुसफुसाया. वो बचपन की एक सहेली  'कस्तूरी'(काल्पनिक नाम) थी. सुंदर,स्मार्ट, सजी धजी, सम्पन्नता झलक रही थी उसके रहन सहन से. मैंने उसे  पहचान लिया क्लास में सबसे पीछे बैठती थी वो.  पढ