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ख़त्म न होगा तेरा गाना रे पपीहे जायेंगे युग बीत' : प्रकृति राय

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ओरे पपीहे ! यही है जग की रीत, कौन किसी का मीत ?  किस की ख़ातिर तू गाता है, ये मन मोहक गीत ! इस जंगल में कौन सुनेगा पपीहे तेरा ये संगीत ? सुब्ह सवेरे छेड़ न देना कोई विरह का गीत !   किस को बुलाता है तू निस दिन कौन है तेरा मीत' ?   पी को पुकारे, पी को ढूंडे तेरा इक इक गीत सब को गाना है दुनिया में अपना अपना गीत, कितनी सदियों से जारी है, तेरा ये संगीत ! मिल जायेगा इक दिन तुझ को तेरा बिछड़ा मीत, ख़त्म न होगा तेरा गाना रे पपीहे जायेंगे युग बीत' गाता जा तू सांझ सवेरे , होगी तेरी जीत ! प्रकृति राय   की अनुमति के साथ प्रकाशित 

फ़िल्मी गीत-संगीत का स्वर्ण युग अब नहीं रहा : आभास जोशी

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                    सवाक सिनेमा के सौ बरस पूरे तो हुए पर सिनेमाई संगीत के मायने ही बदल गये . आज़ आपको साठ सत्तर के दशक का सिनेमाई संगीत याद होगा. किंतु बेहद बुरी दशा है हिंदी फ़िल्म संगीत की. बकौल गायक आभास जोशी-"फ़िल्में अब गायकों के लिये अनुकूल नहीं रह गईं हैं." उनके संगीतकार भाई श्रेयस जोशी का मानना है -"फ़िल्मी गीतों की अधिकतम उम्र अब 15 दिन से ज़्यादा नहीं है."      गीतकारों,गायकों, संगीतकारों, के नज़रिये से देखा जाए तो बात बहुत हद तक़ बेहद सही और सटीक ही है.        दीपावली के मौके पर अपनी दादी से मिलने जबलपुर आए आभास ने बताया - उनका एलबम एच.एम.वी. से ज़ल्द ही निकलेगा. फ़्यूज़न एलबम "ठगनी" कबीरदास जी की रचनाओं पर आधारित है. 2012 के बीतते बीतते आभास जोशी की गायकी आप श्रेयस के संगीत निर्देशन बेहद असरदार साबित होगा.    इस वीडियो एलबम की आडियो-वीडियो रिकार्डिग पूर्ण हो चुकी है. प्रोड्यूसर शीघ्र ही इसे लांच करने वाले है..........  आभास जोशी के ताज़ा एलबम महानायका ने भी अपनी जगह बना ली है दीपावली पर आभास श्रेयस जबलपुर में       

वो पाक़ीज़ा-क़िताब है.घर आते ही पढ़ा करो .! !

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चेहरों वाली क़िताब है हौले-हौले पढ़ा करो हर चेहरे पे नक़ाब है  हौले-हौले पढ़ा करो .! खोज रहे हो बेपरवा आभासी  आंचल में सुख वो पाक़ीज़ा-क़िताब है.घर आते ही पढ़ा करो .! ! जो आंखों में लिये समंदर घूम रहे हो गली गली मुफ़लिस की उन आंखो से दुनियां अपनी गढ़ा करो..!! पैदाइश से मरने तक क्या खोया क्या पाया है ऊपर वाला मुनीम है.. तुम तो आगे बढ़ा करो !! इश्क़-मोहब्बत-बेचैनी, बेवज़ह की बातें सब बिरहा की सूली पे हंसते-हंसते चढ़ा करो.!!

बैंयां न धरो धरो बलमा

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