क़ाफ़िर हूं मैं..!!

छवि : चित्रांगदा सिंह

तेरी तस्वीर से बिखरे हुए नूर का मुतासिर..हूं मैं..!
अंगुलियां उठतीं हैं  मुझ पे-कि क़ाफ़िर हूं मैं.....!!


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