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इश्क़

तस्वीर है कि बुत है या कुछ भी नही है वो पूजा करो इबादत करो ये बात कम करो

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:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: एक बूँद भी मिल जाए तो बस  आचमन करो पीते जो हो तो बादाकशों सा आचरण करो . ऐ साकी तुझसे  बूँद का नाता नहीं मेरा  सागर में आके मेरे गंगो-जमुन भरो डटके पियो शराब,पूजा घरों में आप बेदम निढाल होके उसकी शरण पड़ो . लाखों नशे हैं दौरे -तिज़ारत के आज़कल  मय आशक़ी का  मेरे बादा में तुम भरो . तस्वीर है कि बुत है या कुछ भी नही है वो  पूजा करो इबादत करो ये बात कम करो  वो धूप है कि छांव है किसको पता है क्या- वो जो भी है कुछ तो है अब तो नमन करो !  ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::