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अगस्त, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शक़ीरा जी हां वाका वाका वाली

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                       एक हसीन और खूबसूरत सी आवाज़ एवम उर्ज़ा की धनी शक़ीरा यूनिसेफ़ की गुडविल एम्बेस्डर हैं. जी दुनियां की पीढित मानवता के बारे में सोचे उसे  सराहना चाहिये सच मानिये मुझे तो वाका बाला का ये रूप भा गया . और कुछ जानना चाहते हैं तो आईये इधर यदि आपको शकीरा की कोई और अदा पसंद हो तो आप इधर घूम लीजिये

आभास जोशी का नया जीभ पलट एलबम अपर रोलर लोअर रोलर

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आखिर आभास जोशी ने ही सम्हाली छोटे उस्ताद की कमान गीत-संगीत के रियलिटी शो में टी आर पी की दौड़ में पीछे सरकते हुए स्टार प्लस ने आख़िरकार आभास को ही अंतिम रूप से छोटे उस्ताद की एकंरिंग के लिये बुलावा ही लिया. छोटे उस्ताद के मौज़ूदा सत्र में एक से बढ़कर एक उम्दा बाल गायकों की प्रतिभा के से परिचित न करा पाने के लिये स्टार –प्लस ने समीक्षा में पाया कि बिना प्रभावशाली सूत्रधार के यह संभव नहीं अंतत: आठ एपीसोड के बाद आभास को बुलाना ज़रूरी समझा . पहले ही एपीसोड में आभास ने टपोरी की भूमिका में दर्शक जुटाने शुरु कर दिये .   सव्यसाची कला ग्रुप का नया एलबम अपर रोलर लोअर रोलर आभास के सुरों में पोलिओ ग्रस्त बच्चों की मदद के लिये गत वर्ष जारी बावरे फ़क़ीरा प्रस्तुति के बाद सव्यसाची कला ग्रुप जबलपुर द्वारा बच्चों के लिये रुचिकर ”टंग-ट्विस्टर” (जीभ पलट) गीतों के एलबम की तैयारीयां शुरु कर दीं हैं. इस एलबम से अर्जित आय भी संस्था द्वारा ग्राम सोहड़ के नेत्रहीन बच्चे मंगल के लिये खर्च की जावेगी. वर्ष 2008 में आंगनवाड़ी भ्रमण के दौरान गम्भीर कुपोषण के शिक़ार मंगल का पोषण स्तर बढ़ा कर उसके जीवन को संवारने क

शहरी बाबू के लिये

शहरी बाबू के लिये तब की माशूक़ा  और अब की नाज़नीन  और अपने शहरी बाबू के ये हाल हैं आप खु़द देखिये

हमें तो लूट लिया

हुस्न वालों पर इस क़व्वाली में इल्ज़ाम  लगाने वालों की लम्बी फ़ेहरिश्त है कुछ नमूने आज़ यहां कुछेक नमूने यानी बानग़ी देखिये सुनिये ये भी मज़ेदार है न :-  कराओके में सुर मिलाना है तो हाज़िर है संगीत :- नये दौर में यूं गाया :- , मीत जी के खज़ाने में ये था  :- सीमा पार की कसरत देखिये ज़नाब :-

ललित भाई आपने मुझे मेरा पिटना याद दिला दिलाया..!!

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रफ़ी साहब की याद में ललित भाई ने जो गीत लगाया है उसी गीत ने मुझे मेरे अतीत की ओर ढकेला उस अतीत को देखा तो मैं स्कूल के दसवें दर्ज़े का स्टूडेंट  शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोसलपुर के दसवें दर्ज़े के क्लास रूम में दोपहर बाद प्राय: मास्साब बस से जबलपुर निकल जाते थे उस दिन यही हुआ.... रोजिन्ना  की तरह हम हुल्लड़ मचा रहे थे किंतु उस दिन खाली पीरियड में गाने का प्रोग्राम हुआ आखिरी का आधा घंटा था .... टीचर जी बस स्टैंड रवाना हो चुके थे सो हम लोग आपसी फ़रमाईशों के अनुसार  गाना डेस्क बजा बजा के गा रहे थे मेरी बारी आई तो मैने ये वाला गाया गीत पूरा हुआ कोई ताली वाली न बज़ी कमरे मे सन्नाटा था मुझे लगा कोई क़यामत आई है देखा तो मेरे एन पीछे प्रिन्सीपल साहब खड़े थे जैसे ही सर घुमाते चटाक से एक झापड़ अपने गाल पर चिपका पाता हूं..............! को एजूकेशन था लड़कियां भी थीं आस पास के गांव के लड़के भी थे सबके सामने हुए  इस अपमान से दिल भर  आया फ़फ़क़ के रो दिया ............? पर पलट के कोई बात नहीं की दूसरे दिन एक टीचर से कहते सुना स्कूल में "प्रेम मोहब्बत के गाने इस पीढी़ का क्या होगा भगवान ?" द