हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगे

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शाम अधूरी मीत   याद बिन
उसनींदे दिन मीत साथ बिन !
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हम तो तंतु कसे कसे से
ठोकर से सरगम ही देंगे
सर ढोऎंगें तपन पोटली
अपने तलतट छांह ही देंगें !
 क्योंकर मन में अवगुंठन है 
शाम सुहानी कहां प्रात बिन ?
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मोहक मादक मदिरा भीनी
ओढ़ चुनरिया तापस लीन्हीं
मिलन यामिनी सपनन देखूं
तुम अनदेखे मैं अनचीन्हीं !
अब तो मन में अनुगुंजन है
सुबह सलोनी कहां रात बिन ?

टिप्पणियाँ

  1. उम्दा प्रस्तुती ,बिंदास सोच /

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  2. बहुत ही शानदार। काफी दिनों के बाद अपने मन को शांत करने वाले शब्द पढ़े। अच्छा लगा।

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  3. waah lajawaab ise kehte hain hindi kavita maan gaye sir...

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  4. बहुत अच्छा लगा ..गाने का मन कर रहा है पर अभी रिकार्ड नही कर पा रही हूँ.......फ़िर कभी सही.........

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