पोस्ट

अगस्त, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मागों तो दिल और जाँ सब कुछ तुमको दे दूंगीं

इमेज
वो दूर से देख मुस्कुराती शोख चंचल नयनो वाली सुकन्या मुझे भा गई ऊपर की जितनी भी तारिकाएँ हैं उनका हुस्न फीका पड़ गया उसके सामने। मैंने पूछा - मुझे ,कुछ देर का वक्त मिलेगा क्यों नहीं ! ज़रूर मिलेगा । उत्तर में थी मादक खनक ... एक - एक काफी का आफ़र उसमें भी सहज स्वीकृति । मैंने फ़िर कहा - आज मेरी छुट्टी है जबलपुर के पास भेडाघाट है चलो घूम आते हैं । उसमें भी सहमत लगा आज लाटरी लग गई । वीरानी जीवन बगिया में प्रेमांकुर फूट पड़ा .... सोचा आज पहले दिन इतनी समझदार ओर मुझे सहज स्वीकारने वाली अनुगामिनि मिल गई अब जीवन का रास्ता सहज़ ही कट जाएगा। बातों ही बातों में मैंने कहा : तुम मुझे कुछ देने का वादा कर सकोगी ? वादा क्या दे दूंगीं जो कहोगे दिल , हां ज़रूर मोहब्बत ऑफ़ कोर्स वफ़ा क्यों नहीं ? और कभी जब मुझे वक्त की ज़रूरत हो तो ज़नाब ये सब कुछ अभी के अभी या फ़िर कभी ? सोच के बताता हूँ कुछ दिन बाद कह दूंगा । ############################################################## घर में माँ के ज़रि

वंदे मातरम

बारिश को तरसते हम सुनें ये प्रेम गीत

इमेज
Lata Mangeshkar & Talat Mehmood - Aaha Rimjhim Ke Ye Pyare Found at bee mp3 search engine

जाग विरहनी प्रियतम आए

इमेज
देह राग नवताल सुहानी ! मानस चिंतन औघड़ धानी !! भ्रम इतना मन समझ न पाए ! अन्तस-जोगी टेर लगाए जाग विरहनी प्रियतम आए !! मन आगत की करे प्रतीक्षा ! तन आहत क्यों करे समीक्षा !! उलझे तन्तु सुलझ न पाए ! मन का पाखी नीर बहाए !! जाग विरहनी प्रियतम आए !! इक मन मोहे ज़मीं के तारे छब तोरे नूर की एक निहारे ! प्रियतम पथ की बावरी मैं तो भोर - निशा कछु समझ न आए !! जाग विरहनी प्रियतम आए !!

भेज दो लिख कर ही प्रेम संदेश

इमेज
तुम जो रूठ जाती हो मुझसे डेरों शिकायतों के पुलिंदे खोल देतीं हो हाँ तब मुझे यकीन हो जाता है तुम सिर्फ़ मेरी प्रिया हो तुम्हारा अपना चिंतन मुझमें क्या खोज रहा है अनजान हूँ जब तब की तुम्हारी उग्रता अक्सर मुझे संकेत देती है मैं शायद तुम्हें कुछ पलों के लिए बिसर गया प्रिया इस रूठी भुनभुनाई आंसू बहाती तुम जब मेरी आर्त-ध्वनियाँ सुनती हो तब तुम्हारा मेरे पास आ सहज हो बैठना मुझे रास आता है अब खुल के कह दो की तुम ही मुझे प्रीत रंग से भिगो देने वाली हो ये बार बार का रूठना सुकोमल मन को घायल करता है मुझे आता है पहल करना प्रीत का अनुनाद मन के विस्तृत आकाश में भरना परन्तु प्रिया अनुशासन मेरे स्वरों को रोकता है पहल तुम्हें ही करनी है भेजना है प्रेम का प्रथम संकेत सच है न कोई भी पुरूष सर्वप्रथम कभी नहीं खोलता मन के भेद भेज दो लिख कर ही प्रेम संदेश

चर्चा का नया रंग

चर्चा में ब्लागर्स का भाई विवेक ने आज जो स्केच बनाया बेशक उनकी आदमी को बांचने के ज्ञान का बेजोड़ नमूना है। ब्लागर्स के बारे में जिस सधे तरीके से कहा हम तो कायल हो गए । अभी अभी बवाल से हुई चर्चा के मुताबिक विवेक की अंतरजाल पर एक साधा हस्ताक्षर है ! मुझे भी इत्तिफाक है उनसे ईश्वर से विनम्र याचना है उनकी लेखनी धारदार हो असर दार हो साथ ही उनकी पुरानी प्रेमिकाएं कल रक्षाबंधन के अवसर पर कोई चमकीली वस्तु सहित उन पर आक्रमण न कर पाए .