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प्रेम दीप जो तुमने बारे

प्रेम दीप जो तुमने बारे नेह किरण ने किये सकारे ! "हम-तुम" का "संग-दीपक" बाती भर-भर थालों बंटे उजारे...! ************************ किसकी रात हुयी अंधियारी किसके दिन बीते दुखियारे ! किसने कितनी पीड़ा भोगी कौन हुए सुख के हरकारे ! पहुना दीप घर-घर रख दीन्हे - ज़मीं पे उतरे नभ के तारे ? ************************** हर त्यौहार गाँव का मेरे भावों की सुन्दर मंजूषा . सतरंगी पर्वों का भारत ऐसा देश कहीं है दूजा...? अपनी सोच साथ रख अपने मत आके बो तू अंगारे !!

आर्ची

चित्र
मेरे महबूब तेरी यादों का आइना मुझको नीम बेहोशी में ले जाके मदहोश किए जाता है चूम लेतें हैं तेरी तस्वीर को हम वक्त हमको उसी दौर में ले जाता है । जहाँ हम तुम मिले थे पहली बार हुईं थी निगाहें चार तुम मेरी साथी आज भी याद आ रही हो दिल को लुभा रही हो तुम इस तस्वीर से क्यों नहीं बाहर आ रही हो