गुलाब हो न तुम.... ?

रोज़री में सजे 
तुम कल बदले जाओगे
गुलाब हो न तुम
सम्मान में भी मिलते हो 
दूसरे तीसरे दिन 
कूड़ेदान में 
बदहवास मिलते हो 
गुलाब हो न तुम 
तुमको समझने वाला
होता है निराला 
गुलाब हो न तुम 
नेहरू की अचकन से रूमानी सेज तक 
तुमको हर अगली बार 
जमीन पर बिखरा बिखरा पाया
*गुलाब हो न तुम*

टिप्पणियाँ

  1. Very great post. I simply stumbled upon your blog and wanted to say that I have really enjoyed browsing your weblog posts. After all I’ll be subscribing on your feed and I am hoping you write again very soon!

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणियाँ कीजिए शायद सटीक लिख सकूं

लोकप्रिय पोस्ट