रविवार, 30 अक्तूबर 2011

आह..!


तेरे आने से पहले
और
तेरे जाने के बाद
तेरे रोने से पहले
और
तेरे हंसने के बाद
तेरे ग़मों से पहले
और
तेरी खुशियों के बाद
तेरी यादें,तेरी खामोशी,
तेरे दर्द,तेरे आंसू
आकर हमें घेर लेते हैं
कभी तन्हाई का
अहसास ही नही होता.

9 टिप्पणियाँ:

गिरीश"मुकुल" ने कहा…

स्वागतम वंदना जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर एहसास ..

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत खूबसूरत ,बधाई.

.

गुड्डोदादी ने कहा…

तेरे आने का तो पता नहीं चला
जाने के बाद तेरी याद आयी

मनोज कुमार ने कहा…

जब ‘वो’ होता है, तो ‘ये’ सब होता है, फिर तान्हाई कैसा?

Rajesh Kumari ने कहा…

kya baat hai...preet me aksar yesa hi hota hai.bahut achcha ehsaas.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

बहुत ही भावनात्मक अभिव्यक्ति.

प्रेम सरोवर ने कहा…

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेर नए पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

ana ने कहा…

marmasparshi kavita...badhai

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